Teeth pain story|Untold story of my teeth pain .i was meet a strange man and know about his life style changed.

Untold Story of Teeth pain

Listen to this article
कल अचानक मेरे जाड में बुहत दर्द हुआ | तो मेने सोचा के एक पास के डोक्टर से अपना डेंटल चेकउप करवा आती हु | मैं और मेरी दोस्त डॉक्टर के क्लिनिक की तरफ निकल गए वहा के एक मशहूर डॉक्टर थे | जब हम वहा पर पुहंचे तो देखा इंतज़ार कमरे में काफी लोग बैठे थे हमने भी अपनी पर्ची कटवाई और इंतज़ार कमरे में इंतज़ार करने लगे |इतने में हमने कुछ मरीजों को आपसे में बात करते हुए सुना। वो कह रहे थे कोई अजीब सा आदमी आया है आज डॉक्टर के पास ओर पिछले 2 घण्टे से उसी का इलाज कर रहे है |मेरी दोस्त को नए लोगो से मिलने का वह उनके बारे में जानने की बुहत रूचि थी |उसे उस आदमी के बारे में जानने की और उत्सुकता हो गयी। कि ऐसा कोन है जिसके बारे में सब बात कर रहे है | वह बोली की मुझे उस आदमी से जरूर मिलना है। वह डॉक्टर रूम के बहार बैठे अस्सिटेंट के पास गयी और उससे कुछ बात करने लगी और फेर मुझे इशारा किया और डॉक्टर के कमरे की तरफ चलने लगी|अंदर पहुचते ही हम दोनों हैरान रह गए। सच में जिस आदमी के बारे मे इंतज़ार कमरे में सब लोग बात कर रहे थे। वह सच मे ही बुहत अजीब दिखने वाला आदमी था |

डॉक्टर के कमरे मे 3 लोग थे एक डॉक्टर,एक और आदमी और एक वो अजीब दिखने वाला आदमी जो सब कुछ हो रहा था हम बुहत ही दिल दहलाने वाला था जिसे हम बड़ी रुचि से देखने लगे और मन मे चल रहा था कि जरूर ये इनका कोई अपना होगा या कोई रिश्तेदार जा फिर दोस्त | क्योंकि जिस तरह की उस आदमी की हालत थी और जिस तरह से वह लोग उसका इलाज कर रहे थे इतना तो कोई अपने का ही कर सकता है | मेरे अंदर अभी यह सवाल-जवाबा चल ही रहे थे के इतने मे डॉक्टर ने अपना काम पूरा किया और हमारी तरफ देखा। हमें उन्हें हेरानी वाली नजर से देख रहे थे। उन्होंने आखिर पुछ ही लिया कि क्या हुआ बेटा | मेरी दोस्त बोली सर यह आदमी कोन है इसकी ऐसी हालत कैसे हुई लगता है आप का कोई अपना है जो इस तरह से आप इसकी सभाल कर रहे हो |मेरी दोस्त की बात पूरी होते ही डॉक्टर के साथ वाला आदमी हसने लगा और फेर अचानक से चुप हुआ और कहने लगा हां है तो हम सब का अपना ही लेकिन इसके साथ जो हमारा रिश्ता है वो खून के रिश्ते से बुहत आगे का है |हम दोनों एक दूसरे की तरफ देखने लगे फिर उस अंकल ने बोला बेटा सबसे पहले हम सभी का इंसानियत का रिश्ता है। जिस रिश्ते का सबसे पहला फ़र्ज़ है दूसरे जरूरतमंद इंसान की मदद करना है । सो इस आदमी से हमरा इंसानियत का रिश्ता है| फिर डॉक्टर और दूसरे अंकल ने इस तरह की काफी बातें सुनाई इतने मे ही एक और लड़का आता है उसके हाथ मे दो बैग थे एक बैग मे कुछ नए कपडे और दूसरे मे कुछ खाने का सामान |असल मे वो अजीब दिखने वाला आदमी मानसिक और शारीरिक रूप से विकलांग था जिसकी हालत दिखने मे बुहत ही खराब थी ओर उसके अंदर से इतनी भयानक बदबू आ रही थी किवह पर खड़ा होना भी बहुत मुश्किल हो रहा था। लेकिन मंजर इतना दर्दनाक व इंसानियत वाला थ की हम लोग फिर भी खड़ेहोकर वो सब देखते रहे।

जिसकी हालत दिखने मे बुहत ही खराब थी उसके पेरो मे बुहत बदबुदार जुराभ पहने हुई थी और बिलकुल फटे हुए कपडे ओर कूड़े से भर हुवा बेग उसने अपने पीठ पर लगा रखा था ओर उसमेसे भी भीत भयानक बदबू आ रही थी ओर मख्खियां भी उसके ऊपर इस तरह से लगी हुई थे जैसे कूड़े दान पर लगी होती है। सबसे दर्द नाक व कठिन कार्य ये था कि उसके हाथ के अंगूठे में ऊपरनीचे 2 रिंग फसी हुई थी जिन्हें उस डॉक्टर को काटने में बहुत परेशानी हो रही थी जिसकी वजह से उसके हाथ में सूजन व बहुत बड़ा जख्म बना हुवा था। ओर सबसे सहन न करने वाली जो बात यकेथी कि उस आदमी से बुहत भयंकर बदबू आ रही थी। जिससे पूरा क्लिनिक बदबूदार हो गया था। हद तो जब हो गयी जब वो भी उस मनधबुद्धि इंसान को नए कपड़े पहनाने लगा तो वो भाई बिल्कुलनगा हो गया हम लोगो ने अपना मुँह दुपट्टे से ढक लिया। उससे भी हेरानी की बात ये थी की वो भाईव डॉक्टर साहब ने मिलकर बड़ी मुश्किल से उसको कपड़े पहनाए । ओर उसको खाना खिलाया वपानी से साथ उसको दवाइया दी। हमने उनसे पूछा क्या रिश्ता है आपका इनके साथ वो हसे और कहने लगे इंसानियत का । हम एक दूसरे की तरफ देखते रहे इतने मे वो लड़का बोला मैडम जी जिस बीमार आदमीकी बदबू ने 10 मिंट में ही आपका बुरा हाल कर दिया उसी बीमार आदमी का इलाज पिछले 2 घंटे से डॉक्टर सर कर रहे है वो सिर्फ इंसानियत के रिश्ते के लिए|
उनकी बातों में एक अलग सी खुशबु थी । फिर वो लड़का उस बीमार आदमी को क्लिनिक से बहार ले गया और फिर मेरी दोस्त ने अपना चेकउप करवाया और हम घर आ गए ।

Untold story of teeth pain
See before or after image of that strange man

कुछ दिनों बाद मेरी दोस्त मार्किट में कुछ सामान लेने गयी और फिर उसने थोड़ी देर बाद मुझे कॉल किया और मुझे भी जल्दी मार्किट में आने के लिए कहा। जैसे ही मे मार्किट में पुहंची तो मेरी दोस्त ने एक आदमी की तरफ इशारा किया और पूछने लगी क्या तुम उस आदमी को पहचानती हो ? मेने बुहत दयान से उस आदमी को देखा लेकिन मुझे पहचान नहीं आयी .मेने अपनी दोस्त से पूछा कोन है यह आदमी उसने बताया यह वो ही आदमी है जो दिमाग और शारीरक रूप से बीमार था हमे दातों वाले क्लिनिक पे मिला था बुहत ही ख़राब हालत में । में देख के बुहत ही हैरान रह गयी क्यों के उस दिन अजीब दिखने वाले आदमी के आज बिलकुल नए कपडे पहने हुए थे और बुहत ही साफ़ सुथरी हालत में एक कोने में शांत बैठा था । उस आदमी में इतना बदलाव देख के हम उस डॉक्टर के पास गए जिसके पास हमे यह पहली वर मिला था ।हमने डॉक्टर सर के पास जाते ही बोला क्या आप ने अभी उस आदमी को देखा है जिसका आप उस दिन इलाज कर रहे थे इतना सुनते ही वो हसने लगे मेरी दोस्त बोली के उसदिन का एक और सवाल भी है मेरे दिमाग में ।उसदिन
उस अजीब दिखने वाले आदमी कि इलावा बाकी तीनो लोगो मे एक चीज़ एक जैसी थी । आप सभी ने गले मे लॉकेट पहना हुआ था जिसका आकर 1 जैसा था । आज भी वह लॉकेट आप के गले में है । हमे एक बात समझ नहीं आयी इसका आकर 1 जैसा क्यों है । वह फिर मुस्कराये
और बोले बेटा यह हमारे गुरु जी की निशानी है और इसका मतलब है “हम सब एक है और हमारा मालिक एक है”. फिर उन्होंने एक तस्वीर की तरफ इशारा किया और बोला कि यही है हमारे गुरु जी संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान जिन्होंने हमें सबसे पहले इंसानियत का रिश्ता निभाने की कसम खिलाई है। । जिस बीमार आदमी के अभी ठीक होने की आप बात कर रहे हो यह सब हमरे गुरु जी की शिक्षा से हम सबने मिलके वह प्रभु का नाम लेके किया है फिर उन्होंने ने ऐसे दिमागी और शारीरकरूप से बीमार लोगो को सभालने की मुहीम कि बारे में बताया ।
यह मुहीम भारत मे 10 प्रांतो में अबी तक 1000 से जयादा ऐसेसार्वजनिक स्थानों पर पागल/मंदबुदी लोगो का इलाज करवा कर व उनका पता करके उनके घर तक पहुचा चुकी है। यह मुहिम संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान दुवारा चालयी गयी है ।इस मुहीम को आज भी उनके चाहने वाले,इंसानियत के रक्षक दिलो जान से निभा रहे है ।
ये उक्त प्रत्यक्ष उदहारण है इसकी सच्चाई जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करके वीडियो देख सकते है।

8 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *