प्रेमचंद कहानी

प्रेमचंद व् उनकी बेटी की दर्द भरी कहानी

मेरा नाम प्रेमचंद है । मैं कबीर दास जी व रविदास जी को अपना भगवान मानता था मानता हूँ और मानता ही रहूँगा । में आज आपसे अपने दर्द भरी बात बताने जा रहा हूं । मेरे परिवार में तीन बच्चे हैं जिनमें दो लड़के हैं । एक मेरी बेटी हैं । मैंने सभी की शादी कर दी है

शादी का टूटना

अचानक मेरे परिवार में एक तूफान आ गया । बेटी की शादी के 3 वर्ष बाद वो बीमार हो गई । जांच कराने पर पता चला की उसके यूट्रस में बहुत बड़ी रसोली बन गई है । डॉक्टर ने बोला कि इसका ऑपरेसन करना पड़ेगा और आगे इसको बच्चे नहीं हो सकते । यह बात सुनकर उसके ससुराल वाले भड़क गए और हमे गाली देने लगे । काफी झगड़ा होने के बाद उन्होंने मेरी बेटी को घर से निकाल दिया । कुछ समय बाद मेरी बेटी को तलाक दे दिया ।

पड़ोसी का घर आना

मैंने उसका इलाज कराया व ऑपरेशन के बाद मेरी बेटी की जान बची । मैं अंदर ही अंदर अपनी बेटी के दुःख से बहुत परेशान रहने लगा । मैं सोचता था मेरी बेटी से शादी कौन करेगा । हम लोग छोटी ज़ाती व बाल्मीकि समाज के रहने वाले हैं । अति गरीबी से जीवन व्यतित कर रहे है । हमारा दुःख कब व केसे दूर होगा । ये बातें मुझे दिन रात खाए ज़ा रहीं थीं ।

एक दिन अचानक मेरे घर में मेरा पड़ोसी आया । उसने मेरी परेशानी को सुना । फिर मुझे डेरा सच्चा सौदा के बारे में बताया । उसकी बात सुनकर मेरे मन में एक आशा की किरण जागृत हुई कि हो सकता है मेरी बेटी का भला डेरा में जाकर भी हो जाए । मैंने उस भाई को बोला कि हम लोग बाल्मीकि समाज से आते हैं । छोटी जात से आते हैं । तो हमारे कष्टों का निवारण कैसे हो सकता है ? हम लोग कबीर दास जी व रविदास जी को भगवान मानने वाले हैं । हम तो केवल इन्हीं को भगवान मानते हैं । किसी और को देखना भी पसंद नहीं करते है । फिर मैं डेरा में कैसे जा सकता हूँ ?  

डेरा सच्चा सौदा का कोई अलग से धर्म या संप्रदाय नहीं है

उसने मुझे बताया कि वहा पर किसी का धर्म परिवर्तन नहीं किया जाता बल्कि सभी का सम्मान किया जाता है । डेरा सच्चा सौदा सर्व धर्म संगम है । वहा पर सभी जाती , धर्म व संप्रदाय के लोग आते है । सभी को एक ही समझा जाता है । उसने बोला की आप जिनको भी मानते है उनको मानते रहे । डेरा मे सभी पीर ,संत, महात्माओ को ही मानने के लिए बोला जाता है । सभी संत पीर अवतार व पैगंबरों का सम्मान किया जाता है । डेरा सच्चा सौदा का कोई अलग से धर्म या संप्रदाय नहीं है ।

उसने मुझे समझाया कि आप एक बार मेरे कहने से डेरा सच्चा सौदा में चले मैंने उसकी बात मानते हुए डेरा में गया । लेकिन मेरे अंदर कबीर दास जी व भगवान रविदास जी की बातें ही सर्वोपरि चल रही थी ।

संत कबीर जी व संत रविदास जी की बातों

जब हम लोग डेरा में गए और मैंने गुरु जी के मुखारविंद से कबीर दास जी व बादशाह इब्राहिम अदम की कहानी सुनी तो मैं य़ह सुनकर के दंग रह गया । जिस तरह से गुरु राम रहीम जी ने कबीर दास जी व रविदास जी की रहस्यमय बातें बताई । एसे बातें तो मेने कभी सोची भी नहीं थी।

गुरु राम रहीम जी वहां पर लाखों लोगों को संत कबीर जी व संत रविदास जी की बातों पर चलने की प्रेरणा दे रहे थे । जो हमारा समाज कल्पना भी नहीं कर सकता था । उन बातों से भी ऊपर हमारे बाल्मीकि समाज के लिए कर रहे है । कबीर दास जी की गूढ़ बातों का रहस्य बड़े आसान शब्दों में समझा रहे थे । यह बात सुनकर के मैं दंग रह गया ।

एक सिख समाज से जुड़ा हुआ गुरु नीची जाति के लोगों की बातों को व उनके दर्द को कैसे समझ सकता है ?  क्या कोई गुरु रविदास जी और कबीर दास जी को इतना दिल से भी प्यार करने वाला भी मुझे मिल सकता था ? यह बातें सोच कर के मेरे मन में गुरु राम रहीम जी के लिए बहुत श्रद्धा व उनके ऊपर विश्वास बन गया ।

मुझे डेरा में जा करके बहुत अच्छा लगा जिसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता । मैंने वहां देखा कि बाबा जी ने 2 तलाकशुदा लड़कियों की  शादी कराईं जिसे देख कर मेरे आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं  रहा ।  वो भी ऊंचे घरों के लड़कों से ।

इसके बाद हम लोग घर आ गए और मैंने पूरी बात अपने परिवार मे बताई । मेरे परिवार वाले कहने लगे कि हम बाल्मीकि समाज से जुड़े हुए हैं । हम गुरु कबीर जी व गुरु रविदास जी को  मानने वाले हैं । हम किसी और को कैसे मान सकते हैं ?  मैंने उन्हें बताया कि संत जी ने केवल और केवल गुरु रविदास जी व गुरु कबीर जी के बारे में पूरी बातें बताई । जो बातें हम सोच भी नहीं सकते ऐसी ऐसी बातें गुरु राम रहीम जी वहां बैठे लाखों लोगों को समझा रहे थे ।

बेटी के लिए एक लड़के का रिश्ता

कुछ समय बाद हम लोग डेरा में गए और वहां के जिम्मेदारों से मिले उन्होंने मेरी बेटी के लिए एक लड़के का रिश्ता देख रखा था । जब हमने लड़के वालों से बात करी तो बहुत ही हर्षोल्लास से मेरी बेटी के साथ शादी करने के लिए तैयार हो गए । वह परिवार ऊंची जाति से संबंध रखने वाले हैं । मैंने उनको बोला कि हम लोग नीची जाति से संबंध रखते हैं और आप ऊँची जाति से संबंध रखते हैं फिर केसे ये शादी हो सकती है । उन्होंने केवल एक ही बात बोली कि डेरा सच्चा सौदा में कोई जात धर्म का भेदभाव नहीं होता।

यहां पर केवल इंसानियत की शिक्षा दी जाती है और उस पर चलाया जाता है । यह सब कार्य हम अपनी मर्जी से नहीं गुरु जी के कहने से करते हैं । दहेज के लिए उन्होंने बिल्कुल मना कर दिया ।    मैं पहले से ही लूटा हुआ था लेकिन उनकी बातों में सच्चाई नजर आई ।

मैं इस शादी के लिए तैयार हो गया । मैंने अपनी बेटी की शादी डेरा के रीति रिवाजों से उस परिवार मर कर दी । उन लोगों ने मेरा एक भी पैसा मेरा खर्च नहीं करवाया ।

आज मेरी बेटी की शादी को 2 वर्ष से ज्यादा हो गए हैं । वह बड़ी खुशी से अपने ससुराल में रह रही है। यह देख कर में सोचता हूं कि डेरा सच्चा सौदा में आने वाले लोग इंसान है या फरिश्ते । जो फरिश्तों से भी बढ़कर के इंसानियत के काम करते हैं । वाकई में ही बेमिसाल है यह बात मैं आपको बिल्कुल सौ परसेंट सच व आप बीती बता रहा हूं ।

सभी जाति व धर्म का सम्मान

बड़ा दुख होता है जब कोई डेरा सच्चा सौदा के बारे में कुछ झूठी अफवाह फेलाता है ।  जो बिल्कुल निराधार है । झूठी है । हम लोग काफी समय से डेरा में जाते हैं । हमने देखा है कि वहां पर हर जाति, हर धर्म, संप्रदाय के लोग आते हैं । संत राम रहीम जी सभी जाति व धर्म का सम्मान करते हुए सभी को एक समान मानते हैं । आज तक हमने कभी भी संत जी के मुख से किसी जाति या संप्रदाय के बारे में कोई गलत बात नहीं सुनी ।

संत जी ने हमेशा नीची जाति को ऊंचा उठाने के लिए अनेकों कार्य किए हैं । जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण मैंने आपको अपना बताया है । जिसका मैं देन पूरी जिंदगी नहीं दे सकता । जो बातें मैंने इसमें लिखी है बिल्कुल सौ पर्सेंट सच है ईश्वर मेरा साक्षी है ।

धन्यवाद

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