kabhi karj chuka hm skte nahi

Kabhi karj chuka hmm skte nahi satguru se jo etna pyar mila

कभी कर्ज चुका हम सकते नहीं सतगुरु से जो इतना प्यार मिला

Here is Lyrics of “Kabhi karj chuka hmm skte nahi satguru se jo etna pyar mila”

टेक. कभी कर्ज चुका हम सकते नहीं सतगुरु से जो इतना प्यार मिला ।
रहमत से निवाजा मुर्शिद जी हमें खुशियों का भंडार मिला।

1. कोई कर्म हमारा अच्छा नहीं ऐबों से भरे गुनाहगार हैँ हम,
किया अनदेखा हमरे गुनाहों को यह भी देखा न कि खतावार हैँ हम,
सब पापों के कागज फाड़ दिंए हमें ऐसा जी बख्शनहार मिला ।
कभी कर्ज चूका हम सकते नहीं…

2. औकात नहीं थी साइकिल की हमें खूब घुमाया कारो में ,
होंगे मालिक इज्जत शोहरत के न था हमरे कभी विचारों में ,
छोटे पड़ गए दामन जी हमरे ऐसा देने वाला दातार मिला ।
कभी कर्ज चूका हम सकते नहीं…

3. हम थे ठुकराए दुनिया के तूने रहमत कीं संभाल लिया ,
हम लायक नहीं थे नफरत के तूने प्यार से मालोमाल किया ,
कभी कल्पना भी न की हमने इस दर पर जो सत्कार मिला |
कभी कर्ज चूका हम सकते नहीं…

4. कोई कमी ना छोडी दातों की बिन मांगे सब कुछ पाया है ,
हमेँ इतना दिया कि गिनती ना कभी न अहसान जताया है ,
कोई दरवाजा ना ताला है ऐसा शाही दरबार मिला ।
कभी कर्ज चुका हम सकते नहीं…

5. तू ही मात पिता तू ही भाई बहन, सगा तू ही रिश्तेदार मेरा ,
संगी साथी अल्लाह बेली तू ,तू ही प्रभु सिरजनहार मेरा ,
एक पल भी बिछुडऩा चाहूं ना, तुझ में सच्चा परिवार मिला ।
कभी कर्ज चुका हम सकते नहीं…

6. “शाह सतनाम जी का रहयो कर्म देखी मुसलाधार है बरस रहा,
पाया किसी ने अरबों खरब गुना कोई तिनके को है तरस रहा,
“मीत सौदा है तेरी बखिंशश का तूने चाहा उसे बेशुमार मिला ।
कभी कर्ज चुका हम सकते नहीं… । ।

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