सच्चे संत और सच्चे गुरु की पहचान कैसे करे ?

बिन गुरू मुक्ति नाही

आज हमारे देश में गुरु बनाने की परंपरा बहुत तेजी से चल रही है | पुरानी कहावत है कि “गुरु बिन मोक्ष नहीं” गुरु की शिक्षा के बिना इंसान को मोक्ष नहीं मिल सकता | उसे गुरु के दर्शन नहीं हो सकते | यह हमारे पौराणिक ग्रंथों में दर्ज है|

गुरु को अनेक नामों से जाना जाता है

कोई सतगुरु कहता है

कोई भगवान कहता है

कोई अल्लाह कहता है

कोई पिता कहता है

गुरु पूर्णिमा पूरे भारतवर्ष में अत्यधिक जोश और अध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाया जाता है | इसके अतिरिक्त हमारे देश में शिक्षक दिवस भी मनाया जाता है | जो पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के सम्मान में मनाया जाता है |

गुरु किसी कहते है ?

जो अज्ञान रूपी अंधकार मे ज्ञान रूपी प्रकाश से जगा दे उसे गुरु कहते है |

गुरु की जरूरत

गुरु की इंसान को हर कदम पर जरूरत पड़ती है | सबसे पहले माता – पिता , स्कूल टीचर , फिर अधियात्मक गुरु की जो भगवान का ज्ञान व जीवन का असली रहस्य समझा कर भगवान की भगती व सद कर्मों से जोड़े |

गुरु बनाते समय कुछ बातें

  • गुरु किसको बनाया जाए ?
  • सच्चा गुरु कौन सा होता है ?
  • उसकी पहचान कैसे करें ?

आज सबसे बड़ा सवाल यही है | आज हमारे देश में अनेकों गुरु है | इन सब में सच्चा गुरु कौनसा है ? इसकी पहचान करना अति आवश्यक है | आज बहुत से गुरु भूत भगाने में , बीमारियों को खत्म करने का दावा करते हैं , मुक्ति दिलाने का दावा करते हैं , अगले जन्म को सुधारने का वादा करते हैं | मोक्ष की प्राप्ति की बातें करते हैं और बदले में मोटी मोटी दक्षिणा लेते हैं |

  • हम बात कर रहे हैं पूर्ण गुरु की उसकी कैसे पहचान करें ? कुछ खास बातें हैं जो हमने अपने नजरिए से आपके सामने रखी हैं :
  • सबसे पहले किसी भी तरह की दान दक्षिणा, मत्था टिकाई किसी भी रूप में ना लेता हो उसके आश्रम मे दान पात्र भी न लिखा हो |
  • किसी भी तरह का भेदभाव, जाति, संप्रदाय, ऊंच-नीच, अमीर गरीब, रंगभेद की भावना ना रखता हो
  • हमेशा इंसानियत की शिक्षा देकर के पूरे समाज भलाई के कार्य करते हो और पूरी दुनिया को इंसानियत के कामों के लिए प्रेरित करते हो |
  • सबसे पहले अपने आप से इंसानियत के कार्य शुरू करें उसके बाद अपने शिष्यों से इंसानियत के कार्य कराएं |
  • पूर्ण गुरु वह होते हैं जो अपने ऐसो आराम की परवाह ना करते हुए हमेशा दूसरों की मदद के लिए सबसे आगे रहते हो |
  • पूर्ण संत आने वाली सभी विपत्तियों की बातें ना करके उनसे समाज व देश को किस तरह से बचाया जा सकता है उस पर कार्य करता हो | ऐसे ऐसे काम करें

उदाहरण :- जैसे एक प्रत्यक्ष उदाहरण मैं डेरा सच्चा सौदा के संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा का देना चाहूंगा जिन्होंने सन 2010 में डेंगू की भयानक बीमारी आने से 20 दिन पहले देश के सभी ब्लड बैंको को अपने आश्रम मे बुलाकर एक विशाल रक्त दान केंप लगा कर लाखों यूनीट ब्लड बैंको मे जमा करा दिया था |

कुछ बुद्धिजीवीयो ने भी उस समय भी डेरा सच्चा सौदा के संत जी को गलत बोलने में पीछे नहीं रहे , लेकिन उन लोगों के मुंह पर तब तमाचा लगा जब 20 दिन बाद डेंगू का भयानक प्रकोप चला और जो ब्लड बैंक ज्यादा संख्या में ब्लड लेकर के गए थे ठीक 30 दिन के बाद वही ब्लड बैंक डेरा सच्चा सौदा से एक बार फिर गुहार लगाने लगे और हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर संत जी को ऐसी सोच पहले से कैसे आ गई कि यह भयानक बीमारी आने वाली है और उन्होंने पहले से पहले ही सभी ब्लड बैंकों को ब्लड से फुल कर दिया था | यह उदाहरण इतिहास में दर्ज है और दुनिया भी जानती है |

ब्लड दान मे डेरा सच्चा सौदा के नाम 3 विश्व कीर्ति मान है इस जानकारी को और पुख्ता करने के लिए आप किसी भी ब्लड बैंक से इस बारे में चर्चा कर सकते हैं | इस बारे में हमने प्रयाग हॉस्पिटल व कैलाश हॉस्पिटल नोएडा से जानकारी लेकर पुख्ता किया है

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सच्चे संत, सच्चे गुरु की पहिचान

  • सच्चे संत वह होते हैं जो इंसान की छोटी से छोटी समस्या व उसके दर्द को समझ करके उसको दूर करने का पूरा प्रयत्न करें|
  • समाज में चल रही प्रतियेक बुराइयों का खंडन करके समाज को एक स्वच्छ व साफ दिशा दिखाने का प्रयत्न करें |
  • पूर्ण संत वह होते हैं जो समाज की कुरीतियों को खत्म करके समाज को अच्छाई के मार्ग पर ले कर जाएं |

इसका प्रत्यक्ष उदाहरण भी मैं आपको बताना चाहूंगा डेरा सच्चा सौदा के संत जी ने एक ऐसी मुहिम चलाई की वैश्या लड़कियों को उनके कोठे से निकालकर संत जी ने अपनी बेटी बनाया | समाज में उन्हें सम्मान दिलाया | उनकी अच्छे घरों मे शादियाँ कराई है | ऐसा आज तक हमने कहीं भी किसी भी पवित्र ग्रंथ में या इतिहास में नहीं पड़ा है | इस जानकारी की पुख्ता करने के लिए आप कहीं भी डेरा सच्चा सौदा के वेबसाइट पर जाकर के प्रॉपर चेक कर सकते हैं

  • पूर्ण फकीर वह होते हैं जो बेटियों के दर्द को पूरी तरह से समझ करके उनको दूर करें और उस बेटी के दु:ख को सुख में बदल दे |

ऐसा भी उदाहरण हमने डेरा सच्चा सौदा में देखा है कि किस तरह से डेरा सच्चा सौदा में विधवा हुई बेटियों को उनकी शादी करके समाज में स्थापित किया गया| हमने वहां पर देखा है की गर्भ में मार देने वाली बेटी को किस तरह से बचाया गया और उसको डेरा सच्चा सौदा के संत ने गोद लिया ओर अपनी बेटी बनाया | उन्हे वर्ल्ड लेवल की चैंपियन बना करके देश में पूरी दुनिया के सामने ऐसा उदाहरण पेश किया | एसी 25 बेटियों की आज भी संत जी अपनी सगी बेटियों से बढ़कर संभाल कर रहे है | संत जी ने पिता जी की जगह अपना नाम दिया है |

  • पूर्ण संत वह होते हैं जो दुनिया उनको चाहे कितना भी गलत बोले, कितना भी मन घडन्त झूठी बाते दिखाए | वह उसकी परवाह किए बिना समाज व देश का भला करने में लगे रहते हैं |
  • ऐसे गुरु जो पूर्व में चली आ रही गुरु प्रथा को बिना रुके, बिना थके , बिना डरे आगे लेकर चल रहे हो|

ऐसा उदाहरण हमने देखा है | संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान मैं | जिन्होंने समाज में फैल रही नशा जैसी भयानक बुराई को खत्म करने के लिए अपनी जान को भी दांव पर लगा दी है | समाज के दुश्मनों ने अनेकों बार उनपर हमला किया | लेकिन फिर भी बिना डरे और बिना थके समाज की बुराइयों को खत्म करने में आज भी संत जी पूरी तरह से लगे हुए हैं | यह सभी बातें सौ परसेंट सच में प्रत्यक्ष हैं जो हमने अपनी आंखों से और करोड़ों जनता ने अपनी आंखों से देखी है |

आज भी करोड़ों देशवासी संत जी के कहने से अनेकों मानवता भलाई के कार्यो में लगे हुए हैं | मानवता भलाई के ऐसे कार्य जिन्हें कोई सोच भी नहीं सकता |

गुरुओ को लेकर विचारधारा

आज हमारी समाज में गुरुओ को लेकर के अनेकों पाखंड चले हुए हैं | हमें जरूरत है आज अपने विवेक , ज्ञान और धैर्य से उनके बारे में सोचने की | हमारा देश गुरु देश है | हमेशा हमारे देश और पूरी दुनिया के लिए हमारे गुरुओ ने अनेकों कुर्बानिया दी है जिनका कोई देन नहीं दिया जा सकता है |

किसी भी गुरु के बारे में गलत बोल कर के हमें गुरु प्रथा को बदनाम नहीं करना चाहिए बल्कि गुरु प्रथा के अंदर जो चीजें गलत है उनको हमें रोकने का प्रयत्न करना चाहिए | हमे बिना जानकारी किसी गुरु पीर फकीर के बारे मे गलत नहीं बोलना चाहिए | करोड़ों जनता की धार्मिक भावनाओ को हमे ठेस नहीं पहुचानी चाहिए | किसी की धार्मिक भावनों को ठेस पहुचाना का मतलब है अपने ज्ञान का दुरुपयोग करना है | यह हर किसी इंसान के ऊपर निर्भर करता है कि उसको किस गुरु में भगवान नजर आते हैं | हमने अपना नजरिया रखा है | आगे आप की विचारधारा है |

धन्यवाद

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