पल्ले होवे सच तां, वेहड़े (कोठे चढ़के) खड़ के नच ।

अर्थात् सच को आंच नही । सत्य के मार्ग पर चलने वाले आज भी नाच रहे हैं । उन पर ऐसी बातों का प्रभाव नही होता । वे हर समय अपने प्रीतम सच्चे मुर्शिद-कामिल के प्रेम मेँ मस्त-दीवाने उसके दीदार को पाने के लिए ललामित रहते हैं । जेसे के हाथी छोटे-मोटे जानवरों की परवाह किए बगैर अपनी चाल में झूमता हुआ वैसे ही चलता रहता है । अपने सतगुरु के प्रेम दीवाने व सच्चे आशिक भी झूठी अफवाह और दूषित आरोपों की कतई परवाह न करते हुए अपने मुर्शिद का प्यार पाने की कोशिश व इसी धुन मेँ लगे रहते है ।

बुराई और सच्चाई की लडाई तो आदिकाल से चली आ रही हे । प्रत्येक युग मेँ बुराई ने अपनी कुचेष्टा द्वारा सच्चाई को धूमिल करने का प्रयास किया है । आज भी रावण, कंस, दुर्योधन तथा शकुनि जैसे स्वार्थी व्यक्ति कागज के टुकडों पर झूठ बे-नाम प्रकाशित करके श्री राम जीं और श्री कृष्ण जी के आदशों क्रो दवाना चाहते है। यह उनकी सरासर बडी भूल है । यदि काल यौवन पर है तो दयाल कौन सा वृद्ध हो गया है । वह भी दिन प्नतिदिन प्राणियों पर अपनी पूरी रहमत की बर्षा कर रहा डै । दयाल की शक्ति असीम है । सांसारिक स्वार्थी लोग अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैँ । तभी वे इस प्रकार की अशोभनीय हरकतें करते हैँ । किंतु वे इस बात क्रो तो भूल ही जाते हैं कि जिसने तुम्हें बुद्धि दी है उस सर्वशक्तिमान की बुद्धि कितनी विशाल होगी । फिर भी वो अपनी कुचेष्टाओँ के द्वारा लोगों क्रो गुमराह करने का प्रयास करते हैँ । किंतु दयाल की रहमत से लोग भ्रमित नहीं होते । बल्कि उनकी आश्चर्यजनक वृद्धि निरंतर होती रहती है । यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो बताइए?

एक घटना का ख्याल आया है । वह इस प्रकार है हम चार-पांच मित्र परस्पर किसी बिषय पर साधारण वार्तालाप कर रहे थे । इतने मेँ एक ऐसा इंसान आकर बैठ गया जो परमात्मा को बिल्कुल नहीं मानता था । अर्थात् मालिक, ईश्वर पर उसे विशवास नही था । बात सच्चे सौदे की चल पडी कि सच्चाई से प्रभावित होकर नाम-शब्द की अनमोल दात प्राप्त करने के लिए लाखों की संख्या मे लोग आने लगे हैँ । पूज्य शहनशाह जी ने पिछले दिनों में पंजाब तथा हरियाणा में सत्संग लगाकर दो लाख से भी ज्यादा लोगों को नाम की दात बख्श दी है और नशों व बुराइयों से मुक्ति दिलवा दी है । अब उनके परिवार सुख क्री नींद सोने लगे हैं । वह इन्सान जो आया था कहने लगा, ‘तुम्हारे संत तो लोगों को हिप्नोटाइज़(समोहिक नींद) कर देते है और अपनी बात मनवा लेते है ।’ क्या मैंने कोई अनुचित कहा है ?

मैंने कहा यदि तर्क से बात करनी है तो पहले उससे भलिभांति परिचित हो । कम से कम अपनी बात पर वेयर्थ में अड़ा न कर। क्यों ऐसी काल्पनिक बातें स्वयं रच लेते हो ? आप की सोच तथा पैथी के अनुसार हिप्नोटाइज़(समोहिक) एक इंसान एक समय में केबल एक इंसान को ही कर सकता है और जब वह’ स्वयं उसका इच्छुक हो। हिप्नोटाइज़ वाले स्तर की कोई बात तो नही लगती किंतु जब तू यह कहता है तो एक पल के लिए मान लेते है। अब तुम भी सुनो क्या वह ( मुर्शिद ) अकेला करोडों लोगों के भारी समूह को हिप्नोटाइज़ करते है। तुम भी गांवो-नगरों में अपना राग अलापते हो । फिर आप भी सभी को हिप्नोटाइज़ कर लिया करो ना। अब तक तो आपने बुहत सारे लोग पीछे लगा लिए होंगे भाई साहिब ! भाई साहिब बेचारे चुप ।

इस प्रकार दुनिया के लोग किसी पक्ष से भी नहीं छोडते । अपनी काल्पनिक विचारधारा से इतिहास में कांट-छांट करके असत्य कहानियों को जन्म देते हैं । ‘सच को दबाने का प्रयास करते हैं । पर जिनको अपने सच्चे मुर्शिद कामिल पर दृढ विश्वास होता है वह कभी अस्थिर नही होते । वे सुदृढ पर्वत की भांति खडे रहते हैं उन्हे किसी प्रकार की आंधियां, तूफान हिला नहीं सके और न ही आज तिला सकते हैं । भयानक ‘तूफानों और आंधियो से वृक्षों की जड़े तो उखड सकती हैं किंतु ऐसे दृढ विशवासी पर्वतों का वे कुछ भी बिगाड नहीं सकते । वे पहले की भांति अडोल ( स्थिर ) खड़े रहते हैं । जैसे कहा है :-

झुठे, झूठ दे पिंजरे दे विच,

सच्च पंछी हूँ ताड़ नही सकदे ।

झखड़ा नाल ब्रिछ हिल जांदे,

ऐपर हिल पहाड़ नहीं सकदे ।

2 Comments

  • No one can hide the truth…
    Truth will roar soon .

  • Saint Dr.Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan Teaches to everyone to do welfare of mankind.It is the result of there crores of people are decided to sarve the mankind with every means.?

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