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बाबा राम रहीम और आस्था : एक सामाजिक विश्लेषण

ब्रैकिंग न्यूज़ फ्लैश करने लगी ” गंगानगर इलाके में कर्फ्यू”

बैगलोर में कार्यरत गंगानगर निवासी निमिष छुट्टियां मनाने घर आया हुआ था। अपनों के साथ कुछ वक़्त बिताकर 2 दिन बाद फ्लाईट से वापसी की तैयारी थी। सारा परिवार हॉल में टेलीविज़न देखने में मसरूफ था । तभी न्यूज़ चैनल पर ब्रैकिंग न्यूज़ फ्लैश करने लगी ” गंगानगर इलाके में कर्फ्यू” वजह थी डेरा सच्चा सौदा के संत राम रहीम को फैंसला सुनाने के बाद भड़की हिंसा ।

निमिष के मुख का भाव एक दम बदल गया वह गुस्से से लाल हो गया और अनाप सनाप कहने लगा कि बाबा की वजह से समाज को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आखिर क्यों ये संत समाज के लिए जरूरी है? बाबा के पीछे इतने लोग अंधभक्त कैसे हो सकते है ? क्या बाकई में ये संत हमारी समाज को अच्छी दिशा देने का काम कर रहे है ? और भी न जाने क्या क्या |

एक दिन और गुज़रा प्रशासन ने कर्फ्यू में थोड़ी ढील दे दी गई । निमिष सुकून महसूस कर रहा था की समयानुसार वापसी सम्भव हो पाएगी । पर सन्तो की समाज में आवश्यकता और तमाम विवादों की बावजूद उसकी स्वीकार्यता के विचार अभी भी उसके जहन में गूंज रहे थे की आखिर क्या कारण रहा होगा लाखो लोग बाबा का साथ छोड़ने को तैयार नही है?

वापसी का दिन भी आ गया … निमिष ने घरवालो से विदा कहकर एयरपोर्ट के लिए बस पकड़ी । बीच रास्ते में उसकी बराबर की सीट पर एक व्यक्ति बैठा जो चेहरे से बहुत मायूस -सा नजर आ रहा था । तभी कोई छोटा मोटा नशा खरीदकर उसे लेने के लिए उत्सुक था मानो अरसे से नशा न ले पाया हो।

निमिष एक जिज्ञासु स्वभाव का नौजवान था उससे रहा नही गया और उससे मायूसी का कारण पूछ बैठा । आँखों में नमी लिए अधेड़ उम्र का व्यक्ति निमिष का सवाल सुनकर एक पल चौका और काँपते हुए हाथो से आंसू पोछते हुए बोला कुछ समय पहले मजदूरी के सिलसिले में डेरा सच्चा सौदा आना हुआ था और उस माहौल में रहकर दो महीने पहले उसने गुरु से नाम लेकर जाप करना शुरू किया। ऐसा करने से कुछ ही दिनों में उसकी सारे नशे और बाकि बुराइयां उससे दूर होती चली गई। जिंदगी पटरी पर आने लगी थी और वह अब पहले से ज्यादा शांति , सुकून और संतुष्टि महसूस करने लगा । आत्मविश्वास का बीज उसने लगा लिया और वह जिंदगी में पहली बार आईने में खुद की छवि में एक इंसान को देख पा रहा था ।

लेकिन तभी दो दिन पहले चढ़ते सूरज की तरह तरक्की करने वाले डेरा सच्चा सौदा में सब थम गया । मजबूरीवस उसे भी रोजगार की तलाश में प्रस्थान करना पड़ा। आज वह जन्नत जैसे माहौल से निकला तो नशे की तलब जाग उठी और सब कुछ फिर शुरू हो गया ।उसने बताया वह अकेला नही है, बल्कि बाबा हर सत्संग में हज़ारो लाखो लोगो को बुराइयो से दूर रहने और आदर्श जीवन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे ।

नशा व्यापारी , धर्म के नाम पे पैसा लूटने वाले ठग, फिल्मो में अश्लीलता परोसकर समाज को गलत दिशा देने वाले भारतीय सभ्यता के दुश्मन, वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देने वाले बिचोलियों और भी न जाने कितने बुराइयो के ठेकेदारों से दुश्मनी मोल ले चुके थे । उसकी उदासी ने साफ कि वह कुछ समय के लिए ही सही, कम से कम ऊपरी अदालतों से सच सामने नही आ जाता , समाज फिर से बुराइयो में लिप्त हों जायेगा।

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अब तक निमिष को समझ आ चुका था कि सन्त समाज के लिए क्यों जरूरी है? आखिर वो ही तो समाज को जोड़े रखने की कड़ी होते है । उनके कारण ही समाज सही राह पर चलता है । वो ही आम सरकारों दुआरा लागू न कराय जा सकने वाले भले कार्यो को बड़ी आसानी से बड़ी संख्या में लोगो दुआरा मनवा सकने में सक्षम होते है ।

(उपरोक्त संस्मरण सत्य घटाना पर आधारित है )

इस मजदूर की तरह करोड़ो लोग बाबा राम रहीम जी के पास जाकर नशा त्याग चुके थे । लेकिन अब पिछले दो सालो के हालत को देखते हुए
न जाने कितने नशा करने वाले लोग जरूरत महसूस कर रहे है बाबा राम रहीम जी की

  • वो करोड़ो लोग जिन्होंने बाबा जी के कहने पर नशा त्याग दिया ,बुरी आदत बदल दी और इंसानियत में लग गए वो भी आज जरूरत महसूस कर रहे है बाबा राम रहीम जी की ।
  • वो बेश्या जिसको बाबा जी ने अपनी बेटी बनाया और दूसरी तरफ जिसको समाज गन्दी नज़र के बिना नहीं देखता वो आज जरूरत महसूस कर रही है अपने बाप बाबा राम रहीम जी की ।
  • जिनको तीसरे लिंग का दर्जा दिलवाया ,समाज में इज़त दी वो सुख दुआ ( किनर ) समाज जिनके बारे में बाबा राम रहीम से पहले किसी संत पीर फ़क़ीर ने नहीं सोचा, आज जरूरत महसूस कर रहे है बाबा राम रहीम जी की ।
  • वो बेटिया जिनको कुत्ते ने नोच के खाना था उनको बाबा राम रहीम जी ने आसरा ही नहीं दिया ,पूर्ण रूप से बाप का नाम दिया और हर वो फर्ज अदा किया जो एक बाप बेटी के लिए करता है आज वो बेटिया जरूरत महसूस कर रही है बाबा राम रहीम जी की ।

आप लोग भी अपनी राये, बाबा राम रहीम जी की इस समाज को कितनी जरूरत है । कमेंट बॉक्स में जरूर डाले जी ।

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